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Saturday, August 1, 2009

तुम कौन हो ?


तुम कौन हो ?
फलक पर चमकता चाँद,या कोई रोशन सितारा.
गुलशन में खिला सुर्ख गुलाब,या किसी झील का कंवल!
तुम कैसी हो ?
रात की चाँदनी जैसी,या फुलो की खुशबू जैसी.
नगमो की सरगम जैसी,या बदली की घटाओ जैसी!
तुम कहाँ हो ?
अपने आँगन में,या मेरे ख्वाबो में.
इस जमी पे ,या मेरे ख्यालो में,
अपने वजूद में,या मेरी धड़कन में !

2 comments:

alka sarwat said...

मैं सब जगह हूँ ,मैं तुममें भी हूँ और मुझमें भी क्योंकि अहम् ब्रह्मास्मि .
मेरी गली फिर आना

Ishwar said...
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